वैवाहिक एवं पारिवारिक विधि
वैवाहिक एवं पारिवारिक विधि विवाह तथा पारिवारिक संबंधों के विधिक परिणामों से संबंधित है — विवाह बना हुआ है या नहीं, प्रत्येक पति-पत्नी दूसरे से क्या माँग सकता है, बच्चा किसके साथ रहेगा, और परिवार की संपत्ति तथा दायित्वों की व्यवस्था कैसे होगी।
भारत में इन प्रश्नों का उत्तर कुछ सामान्य विधि से और कुछ पक्षकारों पर लागू होने वाली विधि से मिलता है, इसीलिए वैवाहिक मामले में सर्वप्रथम यह तय किया जाता है कि राहत किस अधिनियम के अंतर्गत माँगी जा रही है। कार्यवाहियाँ स्वयं दीवानी प्रकृति की होती हैं: याचिका दाख़िल होती है, साक्ष्य दिया जाता है, और न्यायालय डिक्री अथवा आदेश पारित करता है, जिसे परिस्थितियाँ बदलने पर बाद में परिवर्तित भी किया जा सकता है।
दीवानी चैंबर में सबसे अधिक आने वाले मामले हैं — विवाह-विच्छेद अथवा न्यायिक पृथक्करण की याचिकाएँ, विरोधित अथवा पारस्परिक सहमति से; पति-पत्नी अथवा संतान के भरण-पोषण के दावे तथा विद्यमान आदेश में परिवर्तन के आवेदन; अभिरक्षा, संरक्षकता और मिलने के अधिकार; दांपत्य अधिकारों की प्रत्यास्थापना अथवा विवाह की वैधता की घोषणा की याचिकाएँ; तथा वैवाहिक संपत्ति, स्त्रीधन और विवाह के समय दी गई वस्तुओं के विवाद।
पारिवारिक मामले अनिवार्यतः व्यक्तियों के मामले भी होते हैं। एक तय की गई व्यवस्था — जो उचित रूप से अभिलिखित हो, जिसमें भरण-पोषण की राशि निर्धारित हो और अभिरक्षा स्पष्ट लिखी हो — सामान्यतः विरोधित मुकदमे से कम हानिकारक होती है, और जहाँ पक्षकार इसके लिए तैयार हों वहाँ चैंबर यह स्पष्ट कह देता है। जहाँ मामला लड़ना ही पड़े, वहाँ वह अभिलेख पर लड़ा जाता है: आय के, निवास के, विवाह के, तथा वास्तव में जो दिया-लिया गया उसके दस्तावेज़।
चैंबर के अधिवक्ता वैवाहिक एवं पारिवारिक मामले देखते हैं, जिसमें दाख़िली से पूर्व परामर्श, याचिकाओं और समझौते की शर्तों का प्रारूपण, भरण-पोषण तथा अभिरक्षा के अंतरिम आवेदन, विचारण और अपील सम्मिलित हैं। मामले कोलकाता के उन न्यायालयों में चलाए जाते हैं जिन्हें यह अधिकारिता प्राप्त है।
इस क्षेत्र में क्या आता है
- विवाह-विच्छेद, विरोधित तथा पारस्परिक सहमति से
- न्यायिक पृथक्करण तथा दांपत्य अधिकारों की प्रत्यास्थापना
- पति-पत्नी एवं संतान का भरण-पोषण, तथा आदेशों में परिवर्तन
- अभिरक्षा, संरक्षकता तथा मिलने की व्यवस्था
- विवाह की वैधता के विषय में घोषणाएँ
- स्त्रीधन तथा विवाह के समय दी गई वस्तुओं की वापसी
- समझौते की शर्तों का अभिलेखन तथा प्रवर्तन
- वैवाहिक डिक्री एवं आदेशों से उत्पन्न अपील
ये मामले देखने वाले अधिवक्ता
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बिमलेश कुमार जैन
पचास वर्षों से अधिक समय से वकालत में — संपत्ति और वैवाहिक विधि सहित दीवानी मामलों में।
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आदित्य कुमार जैन
दस वर्षों से अधिक समय से वकालत में, मुख्यतः संपत्ति विधि में, सहयोगियों के दल के साथ।